नई दिल्ली: खबर केसरी - स्कूली शिक्षा में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक मजबूती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) में एक विशेष व्यावहारिक सत्र आयोजित किया गया। अपने इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के एम.एड. (M.Ed.) अंतिम वर्ष के 12 विद्यार्थियों ने NCERT के 'शैक्षिक मनोविज्ञान एवं शिक्षा आधार विभाग' (DEPFE) और 'मनोदर्पण सेल' का दौरा किया।
इस एक्सपोजर विजिट का मुख्य लक्ष्य भावी शिक्षकों को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और संपूर्ण कल्याण के प्रति संवेदनशील व दक्ष बनाना रहा।
- मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श पर गहन सत्र: संवाद सत्रों और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को शैक्षिक मनोविज्ञान, मार्गदर्शन एवं परामर्श (गाइडेंस एंड काउंसलिंग) और मनोदर्पण पहल की सेवाओं से विस्तार से अवगत कराया गया।
- समावेशी और सुरक्षित माहौल पर जोर: कार्यशाला में इस बात पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया कि कक्षाओं में सुरक्षित, सहयोगी और समावेशी शिक्षण वातावरण कैसे तैयार किया जाए, जिससे बच्चे खुलकर अपनी बात रख सकें।
- शिक्षकों की भूमिका होगी अहम: इस प्रशिक्षण सत्र ने भावी शिक्षकों की उस भूमिका को और अधिक स्पष्ट किया, जिसके जरिए वे स्कूलों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता (Resilience) को निखारने में मददगार साबित होंगे।
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