भोपाल, खबर केसरी - बच्चों की कल्पनाओं में आने वाले कल का भारत कैसा होगा, इसकी एक खूबसूरत और जीवंत झलक भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित हिंदी भवन में देखने को मिली। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आयोजित जिला स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता और प्रदर्शनी में शहर के बच्चों ने "विकसित भारत की संकल्पना" और "मेरे सपनों का भारत" जैसे विषयों पर अपनी सोच को रंगों के जरिए कैनवास पर उतारा।
2 लाख से ज्यादा बच्चों ने लिया हिस्सा
यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बन गया। जिला शिक्षा विभाग की देखरेख में भोपाल के 40 संकुलों के 2,585 सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के 2 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों ने इसमें पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। बच्चों ने अपनी कलाकृतियों में स्वच्छ, शिक्षित, आत्मनिर्भर, पर्यावरण-संरक्षित और तकनीक से समृद्ध भारत की शानदार तस्वीर पेश की।
बच्चों की सोच ही राष्ट्र निर्माण की नींव है: मंत्री विश्वास सारंग
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलास सारंग ने बच्चों की पेंटिंग्स देखीं और उनकी सर्जनात्मक सोच की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक चित्रकला प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी के दिलों में पल रहे 'सपनों के भारत' को समझने का एक पवित्र मंच है। बच्चों के चित्रों में दिखने वाला भारत उनके पक्के इरादों और स्वर्णिम राष्ट्र की भव्य कल्पना को दिखाता है।" उन्होंने बच्चों को अपनी कला से राष्ट्र निर्माण में एक्टिव रोल निभाने के लिए भी प्रेरित किया।
प्रतियोगिता के विजेता
निर्णायक मंडल ने कलाकृतियों की गहराई और रचनात्मकता को परखते हुए विजेताओं का ऐलान किया:
- प्रथम पुरस्कार: रिशिता पांडे (शासकीय उ.मा.वि., मिसरोद)
- द्वितीय पुरस्कार: यशवर्धन दुबे (शासकीय उ.मा.वि., राजाभोज)
- तृतीय पुरस्कार: खुशबू शाह (शासकीय उ.मा.वि., हबीबगंज)
- सांत्वना पुरस्कार: सुधा गुप्ता (शासकीय कन्या उ.मा.वि., स्टेशन एरिया) और गरिमा राजपूत (शासकीय उ.मा.वि., बगरोदा)
सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को अतिथियों ने प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
इस खास मौके पर विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, रविंद्र यती, तीरथ सिंह मीणा समेत कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य, नोडल अधिकारी डॉ. भावना शर्मा और अन्य शिक्षाविदों व शिक्षकों का अहम योगदान रहा।


