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स्वामित्व योजना की ई-केवाईसी के बीच शासकीय जमीन पर घमासान, भानेगांव में लगा जनता दरबार

 


हनुमान मंदिर परिसर से लगी आबादी की जमीन पर नाम दर्ज होने को लेकर उठे सवाल, सरपंच राम ठाकरे ने ग्रामीणों के बीच खुली ग्रामसभा कर सामने रखी स्थिति; एक पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप, दूसरा पक्ष पहुंचा एसडीएम और विधायक के दरबार

लांजी/बालाघाट - खबर केसरी - ग्राम पंचायत भानेगांव में स्वामित्व योजना के तहत ई-केवाईसी और नाम सुधार अभियान के बीच आबादी एवं शासकीय भूमि को लेकर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। हनुमान मंदिर परिसर के बाजू में स्थित कुछ आबादी एवं शासकीय खसरों में नाम दर्ज होने को लेकर ग्रामीणों के बीच सवाल खड़े हुए हैं। इसी मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच राम ठाकरे ने ग्रामीणों के बीच विशेष ग्रामसभा एवं जनता दरबार आयोजित कर दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया।मामला केवल जमीन के रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब शासकीय भूमि, राजस्व रिकॉर्ड, मंदिर परिसर और कथित तौर पर नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किन आधारों पर संबंधित भूमि के रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुए और पूरी प्रक्रिया किस तरह संपन्न हुई?शासन के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत भानेगांव में स्वामित्व योजना के अंतर्गत ई-केवाईसी का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सचिव, पटवारी, कोटवार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं रोजगार सहायक सचिव सहित संबंधित अमले की टीम गठित कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।जानकारी के अनुसार नाम सुधार का कार्य पटवारी के माध्यम से किया जाएगा, जबकि समग्र आईडी की ई-केवाईसी रोजगार सहायक एवं सचिव द्वारा की जाएगी। इसी प्रक्रिया के दौरान पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति सामने आने के साथ जमीन से जुड़े कई सवाल भी ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

हनुमान मंदिर के बाजू की जमीन बनी विवाद की जड़

ग्राम पंचायत भानेगांव में हनुमान मंदिर परिसर के बाजू में स्थित कुछ आबादी एवं शासकीय खसरों को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों की ओर से आरोप लगाए गए हैं कि कुछ लोगों के नाम संबंधित भूमि में दर्ज किए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।कुछ ग्रामीणों द्वारा यह भी आरोप लगाया गया कि नाम दर्ज कराने में स्थानीय स्तर पर संबंधित लोगों की मिलीभगत रही। हालांकि साठगांठ के इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यही वजह है कि अब ग्रामीण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रहे हैं।

सरपंच ने लगाया जनता दरबार, आमने-सामने रखी गईं बातें

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत भानेगांव के सरपंच राम ठाकरे ने ग्रामीणों के बीच विशेष ग्रामसभा आयोजित की। जनता दरबार में दोनों पक्षों को अपनी-अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, ताकि जमीन से जुड़े विवाद और आपसी गलतफहमियों को ग्रामीणों के सामने स्पष्ट किया जा सके।सरपंच का कहना रहा कि सारी वास्तविकता ग्रामीणों के सामने आनी चाहिए और शासकीय भूमि से संबंधित स्थिति रिकॉर्ड एवं सर्वेक्षण के आधार पर स्पष्ट होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से खुले तौर पर ग्रामीणों के बीच चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया गया।

एक पक्ष ने जनता के सामने रखी समस्या, दूसरे ने खटखटाया एसडीएम-विधायक का दरवाजा

जनता दरबार में दिलेेश हनुमत ने ग्रामीणों के सामने अपनी समस्या और अपना पक्ष रखा। वहीं मामले से जुड़े दूसरे पक्ष द्वारा न्याय एवं उचित कार्रवाई की मांग को लेकर एसडीएम एवं क्षेत्रीय विधायक के समक्ष अपनी बात रखने की जानकारी सामने आई है।अब मामला स्थानीय पंचायत स्तर की चर्चा से निकलकर प्रशासनिक स्तर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। ऐसे में राजस्व रिकॉर्ड, संबंधित खसरा, नामांतरण/नाम दर्ज करने की प्रक्रिया और भूमि की वास्तविक प्रकृति की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि विवादित भूमि वास्तव में किस श्रेणी की है, रिकॉर्ड में किसका नाम दर्ज है, नाम किस आधार पर दर्ज किया गया और मौके की स्थिति राजस्व अभिलेखों से कितनी मेल खाती है?यदि भूमि शासकीय है तो उसके उपयोग एवं नाम दर्ज होने की प्रक्रिया की जांच आवश्यक होगी। वहीं यदि किसी व्यक्ति के नाम वैधानिक प्रक्रिया के तहत दर्ज किए गए हैं तो संबंधित दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।फिलहाल भानेगांव में स्वामित्व योजना की ई-केवाईसी के साथ जमीन विवाद ने तूल पकड़ लिया है। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासनिक जांच और राजस्व रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति पर है। आने वाले दिनों में जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विवादित जमीन के रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के पीछे वास्तविक स्थिति क्या है और लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है।



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