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पितृ पक्ष 2026: क्यों जरूरी है श्राद्ध और तर्पण? जानें पूर्वजों को प्रसन्न करने के सरल उपाय और नियम

 


🕉️ खबर केसरी विशेष: पितृ पक्ष का महत्व और नियम 🕉️

​सनातन धर्म में 'पितृ पक्ष' (श्राद्ध) का समय अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। यह वह समय है जब हम अपने उन पूर्वजों (पितरों) को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं, जो अब हमारे बीच नहीं हैं। मान्यता है कि इन दिनों में हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से अन्न, जल और सम्मान की अपेक्षा करते हैं। 'खबर केसरी' के इस विशेष लेख में आइए जानते हैं पितृ पक्ष से जुड़ी कुछ अहम बातें।

​श्राद्ध और तर्पण का असली अर्थ क्या है?

​'श्राद्ध' शब्द 'श्रद्धा' से बना है। जो कुछ भी हम अपने पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा से अर्पित करते हैं, वही श्राद्ध है। जल और काले तिल से तर्पण करने का अर्थ है उनकी आत्मा को तृप्त करना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन परिवारों में पितरों का तर्पण और श्राद्ध विधि-विधान से होता है, वहां हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

​पितृ पक्ष में जरूर करें ये काम (पंचबली कर्म)

​पितरों की आत्मा की शांति के लिए केवल ब्राह्मणों को भोजन कराना ही पर्याप्त नहीं माना गया है, बल्कि प्रकृति के अन्य जीवों का भी ध्यान रखना जरूरी है। इसे शास्त्रों में 'पंचबली' कहा गया है:

  • ​गौ ग्रास: भोजन का पहला हिस्सा गाय को खिलाना सबसे शुभ माना जाता है।
  • ​काक (कौआ) ग्रास: कौओं को पितरों का संदेशवाहक और प्रतीक माना जाता है।
  • ​श्वान (कुत्ता) ग्रास: कुत्ते को रोटी खिलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
  • ​पिपीलिका (चींटी) ग्रास: चींटियों के लिए आटा या चीनी डालना।
  • ​देवादि ग्रास: देवताओं के निमित्त अन्न निकालना।

​पितृ पक्ष के दौरान किन बातों का रखें खास ध्यान?

  • ​सात्विकता का पालन: इन दिनों घर में पूरी तरह से सात्विक माहौल होना चाहिए। मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज के सेवन से बचना चाहिए।
  • ​बाल और नाखून न काटें: शास्त्रों के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में बाल, दाढ़ी और नाखून काटना वर्जित माना गया है।
  • ​क्रोध और विवाद से बचें: घर में शांति बनाए रखें। मान्यता है कि जिस घर में क्लेश होता है, वहां से पितर निराश होकर लौट जाते हैं।
  • ​दान-पुण्य: इस समय गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

​पूर्वजों का आशीर्वाद है सबसे बड़ी पूंजी

​आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी जड़ों को भूल जाते हैं। पितृ पक्ष हमें याद दिलाता है कि हम आज जो कुछ भी हैं, वह हमारे पूर्वजों के आशीर्वाद और उनके द्वारा किए गए संघर्षों का ही परिणाम है। इसलिए, इन दिनों में पूरी श्रद्धा के साथ अपने पितरों को याद करें और जीवन में तरक्की का आशीर्वाद लें।

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