सुखदेव सिंह राजपूत, कटंगी, खबर केसरी : आधुनिक दौर में जहां सामाजिक बैठकें बंद कमरों और सोशल मीडिया तक सिमट कर रह गई हैं, वहीं मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से एक बेहद सकारात्मक और प्रेरक तस्वीर सामने आई है। जिले के कटंगी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम उड़की ने पुरानी ग्रामीण परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए नशामुक्ति के खिलाफ एक अनोखी मुहिम छेड़ी है। यहां ग्रामीणों ने गांव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।
परंपरा के जरिए सामाजिक बदलाव की पहल
पुराने समय में गांव के सभी अहम मुद्दों और जनहित के विषयों पर बरगद के पेड़ के नीचे ही चर्चा हुआ करती थी। उड़की गांव के लोगों ने इसी पुरानी और प्रभावशाली परंपरा को फिर से जीवित किया। इस बैठक में गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और नशे के खिलाफ खुलकर अपने विचार रखे।
बैठक के मुख्य बिंदु और ग्रामीणों का संकल्प:
- नशा सिर्फ व्यक्ति का नहीं, परिवार का नाश करता है: बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि नशे की लत केवल एक इंसान का स्वास्थ्य नहीं बिगाड़ती, बल्कि पूरे घर की आर्थिक स्थिति, शांति और बच्चों का भविष्य तबाह कर देती है।
- प्रशासन के भरोसे नहीं, समाज को लेनी होगी जिम्मेदारी: ग्रामीणों ने एक सुर में यह संदेश दिया कि नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन के भरोसे नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज के हर व्यक्ति को खुद आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
- युवाओं और बच्चों पर खास नजर: चौपाल में विशेष रूप से युवाओं से अपील की गई कि वे नशे जैसी कुरीतियों से दूर रहकर अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएं। साथ ही, अभिभावकों को भी अपने बच्चों की संगत पर नजर रखने की सलाह दी गई।
बदलाव की एक शानदार मिसाल
बरगद के पेड़ के नीचे आयोजित हुई यह बैठक केवल एक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पूरे ग्रामीण समाज को एकजुट करने का काम किया है। ग्राम उड़की की यह पहल साबित करती है कि जब समाज अपनी जड़ों से जुड़कर एक साथ खड़ा होता है, तो बड़े से बड़े बदलाव की शुरुआत वहीं से हो जाती है। यह मुहिम आसपास के अन्य गांवों के लिए भी एक मिसाल बन गई है।
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