सिस्टम की अनदेखी का शिकार हुआ गांव: न पीने का साफ पानी, न चलने को ढंग की सड़क; मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग
- नीमखेड़ा गांव में सड़क, पेयजल, और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव।
- खराब रास्तों और बजबजाती नालियों से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घर से निकलना हुआ मुहाल।
- सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित, धरातल पर दावों की निकल रही हवा।
- परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार, अब ठोस कदम उठने का इंतजार।
विक्की नेताजी, खबर केसरी, नीमखेड़ा - एक तरफ जहां शासन-प्रशासन गांवों के विकास और कायाकल्प के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं नीमखेड़ा गांव की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां के ग्रामीण आज भी उन बुनियादी सुविधाओं के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, जो उनका मौलिक अधिकार है। गांव में मूलभूत सुविधाओं का इस कदर अभाव है कि लोगों का रोजमर्रा का जीवन भी मुश्किलों से घिर गया है।
सड़क, पानी और सफाई सब नदारद
ग्रामीणों का दर्द छलक कर सामने आ रहा है। उनका कहना है कि गांव में न तो चलने के लिए ढंग की सड़कें हैं, न पीने के लिए शुद्ध पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था है, और न ही साफ-सफाई का कोई इंतजाम। नालियों की स्थिति इतनी बदतर है कि गंदा पानी रास्तों पर बहता है। इस खस्ताहाल व्यवस्था के कारण बच्चों को स्कूल जाने में और बुजुर्गों-महिलाओं को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कागजों में योजनाएं, हकीकत में परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक, शासन की जिन योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जाता है, उनका लाभ नीमखेड़ा गांव तक प्रभावी रूप से पहुंच ही नहीं पा रहा है। हर दिन गांव वालों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए जूझना पड़ता है। ऐसा लगता है जैसे विकास का पहिया इस गांव तक पहुंचने से पहले ही थम गया हो।
अब प्रशासन के जागने का इंतजार
लंबे समय से बदहाली का दंश झेल रहे ग्रामीणों ने अब संबंधित विभाग और प्रशासन से गुहार लगाई है कि गांव की इन गंभीर समस्याओं का जल्द से जल्द निराकरण किया जाए। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इन जायज शिकायतों पर प्रशासन के आला अधिकारी कब ध्यान देते हैं और नीमखेड़ा गांव की तस्वीर बदलने के लिए कब कोई ठोस कदम उठाया जाता है।
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