देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने लेंडिंग रेट्स में किया इजाफा; नए और पुराने दोनों तरह के कर्जदारों की बढ़ेगी मासिक किस्त, समझें पूरा गणित
नई दिल्ली, खबर केसरी - त्योहारी सीजन के बीच अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों और पहले से होम लोन चुका रहे ग्राहकों को देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बड़ा झटका दिया है। बैंक ने अपनी लेंडिंग दरों में संशोधन करते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले का सीधा असर करोड़ों ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा और अब हर महीने खाते से कटने वाली ईएमआई (EMI) पहले से ज्यादा हो जाएगी।
ब्याज दर बढ़ने से क्या बदला?
बैंक द्वारा ब्याज दरों में की गई इस बढ़ोतरी का असर फ्लोटिंग रेट वाले सभी तरह के होम लोन पर तुरंत प्रभाव से लागू होगा:
- मौजूदा ग्राहक: जिन ग्राहकों का होम लोन पहले से चल रहा है और जिनका लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR/RLLR) या MCLR से लिंक है, उनकी मासिक ईएमआई बढ़ जाएगी। अगर बैंक ईएमआई की राशि नहीं बढ़ाता है, तो उनके लोन की अवधि (Tenure) लंबी हो जाएगी, जिसका मतलब है कि उन्हें कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज चुकाना होगा।
- नए ग्राहक: जो लोग अब नया होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब पहले के मुकाबले अधिक ब्याज दर पर कर्ज मिलेगा।
ईएमआई का गणित: समझिए जेब पर कितना पड़ेगा बोझ
मान लीजिए किसी ग्राहक ने 20 साल के लिए ₹30 लाख का होम लोन लिया हुआ है:
- ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरी (10 से 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.10% से 0.25%) होने पर भी हर महीने की ईएमआई में लगभग ₹500 से ₹800 तक का इजाफा हो सकता है।
- पूरे 20 साल के टेन्योर में यह अतिरिक्त रकम लाखों रुपये में पहुंच जाती है।
अगर लोन की राशि ₹50 लाख या उससे ज्यादा है, तो मासिक ईएमआई का बोझ और ज्यादा बढ़ेगा।
ग्राहकों के पास अब क्या विकल्प हैं?
ब्याज दरें बढ़ने के बाद वित्तीय जानकारों का मानना है कि कर्जदारों को अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव करना चाहिए:
- पार्ट-पेमेंट (Part-Payment): अगर आपके पास कोई अतिरिक्त फंड या बोनस का पैसा आता है, तो उससे लोन का कुछ हिस्सा पहले चुका दें। इससे आपका मूलधन (Principal) घटेगा और बढ़ी हुई दरों का असर कम होगा।
- टेन्योर बनाम ईएमआई: अगर आपका मासिक बजट ठीक है, तो बैंक से कहकर लोन का टेन्योर (अवधि) बढ़ाने के बजाय ईएमआई की राशि बढ़वा लें, ताकि आप लंबे समय तक ब्याज के चक्रव्यूह में न फंसे रहें।
- क्रेडिट स्कोर पर ध्यान: बैंक आमतौर पर उन ग्राहकों को सबसे कम ब्याज दर ऑफर करते हैं जिनका सिबिल/क्रेडिट स्कोर 750 या उससे ऊपर होता है। इसलिए अपने क्रेडिट स्कोर को हमेशा मजबूत रखें।
त्योहारी सीजन में जहां लोग घर और प्रॉपर्टी खरीदने की तैयारी में जुटे थे, वहीं SBI का यह कदम ग्राहकों के होम बजट को थोड़ा टाइट जरूर कर सकता है।
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