मानवाधिकार आयोग की समीक्षा बैठक में फूटा गुस्सा; बोले- 'अधिकारी ठेकेदारों को बचाना बंद करें, कामगारों के पास न ग्लव्स थे न मास्क, वीडियो सबूत के साथ बैठक में पहुंचे थे कानूनगो
जबलपुर:
जबलपुर नगर निगम में ठेकेदारी प्रथा के तहत काम कर रहे सफाई कर्मियों के शोषण का बड़ा मामला सामने आया है। सरकार द्वारा निर्धारित तय मानदेय 12,245 रुपये के मुकाबले ठेकेदार मजदूरों को केवल 8 हजार रुपये थमा रहे हैं। इसका खुलासा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो द्वारा जबलपुर में ली गई समीक्षा बैठक के दौरान हुआ। बैठक में जब निगम अधिकारियों ने ठेकेदार का बचाव करने की कोशिश की, तो कानूनगो भड़क उठे और दो टूक कहा— "जब तंत्र में निचले स्तर के पढ़े-लिखे और जिम्मेदार लोग ही बेईमान हो जाएं, तो शीर्ष पर बैठा कोई भी व्यक्ति अकेले व्यवस्था नहीं सुधार सकता।"
कागजों में 12,245, हकीकत में 8 हजार
समीक्षा बैठक में जब नगर निगम के अधिकारियों से पूछा गया कि ठेके पर कितने सफाईकर्मी तैनात हैं, तो अधिकारियों ने 3,700 का आंकड़ा दिया, जिसमें 2,800 झाड़ू लगाने वाले कर्मी बताए गए। अधिकारियों ने दावा किया कि हर सफाईकर्मी को नियमानुसार 12,245 रुपये दिए जा रहे हैं।
इस पर आयोग सदस्य ने ऑन-द-स्पॉट सबूत सामने रख दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है और ठेकेदार खुलेआम मजदूरों के वेतन से 4 हजार रुपये से अधिक की कटौती कर रहे हैं।
ग्वारीघाट पर खुद जाकर खोला सच, न सुरक्षा किट मिली न पूरा वेतन
प्रियंक कानूनगो ने बैठक में ग्वारीघाट पर सफाईकर्मियों से सीधे संवाद का एक वीडियो पेश किया। वीडियो में कचरा गाड़ी और घाट पर काम कर रहे मजदूरों ने बताया:
- उन्हें न तो हाथ के ग्लव्स (दस्ताने) दिए गए हैं और न ही मास्क।
- पूछने पर मजदूरों ने साफ कहा कि उन्हें महीने के सिर्फ 8,000 रुपये ही मिलते हैं। 12 हजार रुपये कभी किसी को नहीं मिले।
- जब अधिकारियों ने यह दलील देने की कोशिश की कि "मजदूरों ने शायद एडवांस ले रखा होगा", तो कानूनगो ने सख्त लहजे में कहा कि अधिकारियों का काम ठेकेदारों की वकालत करना नहीं है। अग्रिम राशि देकर बंधुआ मजदूरी कराने पर कौन सी धाराएं लगती हैं, इसका अहसास अधिकारियों को होना चाहिए।
"प्रिंसिपल एम्प्लॉयर और ठेकेदार दोनों पर होगी सीधी कार्रवाई"
बैठक में उपस्थित प्रभारी कलेक्टर/सीईओ और निगम अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए आयोग सदस्य ने कहा:
- बैंक खाते का रिकॉर्ड तलब: जिस मजदूर का वीडियो सामने है, उसके खाते में ठेकेदार द्वारा किए गए ट्रांसफर का रिकॉर्ड तुरंत पेश किया जाए।
- जवाबदेही तय: कानून में 'प्रिंसिपल एकाउंटेबिलिटी' मुख्य नियोक्ता (नगर निगम प्रशासन) की होती है। ठेकेदार की गड़बड़ी के लिए निगम अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
- व्यक्तिगत केस दर्ज होंगे: जितने भी सफाईकर्मियों के शोषण की शिकायतें सामने आएंगी, उनमें ठेकेदार के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों (प्रिंसिपल एम्प्लॉयर) के खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कानूनगो ने दो टूक चेतावनी दी कि मजदूरों के बुनियादी अधिकारों और सुरक्षा उपकरणों में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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