खबर केसरी, जबलपुर: - अगर मजबूत इरादे हों, तो बदलाव की शुरुआत एक छोटे से गांव से भी हो सकती है। जबलपुर के आदिवासी बाहुल्य ग्राम समनापुर के किसानों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। आज से 10 साल पहले इन किसानों ने कोदो-कुटकी और मोटे अनाज की विलुप्त होती प्रजातियों को बचाने के लिए एक 'सामुदायिक बीज बैंक' बनाया था। आज यह बैंक ना सिर्फ बीजों को सहेज रहा है, बल्कि आसपास के कई गांवों के किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित भी कर रहा है।
चूहों से बचाया, फिर 'आत्मा' ने बढ़ाया साथ
बैंक चलाने वाले किसान समूह के अध्यक्ष पूरण लाल सैयाम ने बताया कि शुरुआती दो साल काफी मुश्किलों भरे रहे। कच्चे मकान में बीज रखे जाते थे, जिन्हें चूहों से बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन 2014-15 में 'आत्मा परियोजना' से उन्हें 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिली। इससे बीजों को सुरक्षित रखने के लिए कंटेनर खरीदे गए। आज इस बैंक में कोदो (खुटिया, सायरा), कुटकी, रागी, कंगनी, ज्वार, बाजरा और लाल-हरी भिंडी जैसी कई देसी वैरायटी सुरक्षित हैं।
सिस्टम ऐसा कि कभी खत्म नहीं होता स्टॉक
इस बीज बैंक का सिस्टम बहुत ही शानदार है। समनापुर के अलावा बासनपानी, धुवई, मोठार और बम्हनी के करीब 25 से 30 किसान हर साल यहां से बीज लेते हैं। मजे की बात ये है कि किसानों को इसके लिए पैसे नहीं देने पड़ते, बल्कि बीज के बदले बीज लौटाना होता है। किसान जितना बीज ले जाते हैं, फसल आने पर उसका डेढ़ गुना बीज बैंक में वापस कर देते हैं। इससे बैंक का स्टॉक हमेशा भरा रहता है।
अफसरों ने की तारीफ, बताया सरकारी योजना का फायदा
हाल ही में 'मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान' के तहत आत्मा परियोजना की डायरेक्टर डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने इस बीज बैंक का मुआयना किया। उन्होंने किसानों की इस देसी और असरदार पहल की जमकर तारीफ की। इस दौरान उन्होंने किसानों को 'रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना' की जानकारी भी दी, जिसके तहत कोदो, कुटकी, रागी जैसे मोटे अनाज उगाने वाले किसानों को सरकार 1000 रुपये प्रति क्विंटल की एक्स्ट्रा आर्थिक मदद दे रही है।
#DepartmentOfAgriculture #MP #Jabalpur #khabarkesri

