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पनागर की अनीता बाई ने उन्नत खेती से लिखी सफलता की इबारत, 'भीमा' अरहर से बदली रंगत

 


दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत 1 हेक्टेयर में ली बंपर फसल; वैज्ञानिक मार्गदर्शन से क्षेत्र के किसानों के लिए बनीं मिसाल

​पनागर/जबलपुर (निज प्रतिनिधि) -  केंद्र व राज्य सरकार की कृषक हितैषी योजनाओं और वैज्ञानिक खेती के समावेश से ग्रामीण अंचल में सुखद बदलाव दिखाई दे रहा है। पनागर विकासखंड के ग्राम छत्तरपुर की महिला कृषक श्रीमती अनीता बाई कोल ने पारंपरिक खेती का तरीका बदलकर अरहर की बंपर पैदावार ली है। उन्नत तकनीक से खेती कर उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि वे पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन गई हैं।

​वैज्ञानिक पद्धति से अपनाई 'भीमा' किस्म

दालों के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' चलाया जा रहा है। इसी मिशन के तहत अनीता बाई ने अपने 1 हेक्टेयर रकबे में अरहर की उन्नत किस्म 'भीमा' (JRG-152) का प्रदर्शन खेत तैयार किया और पारंपरिक परिपाटी से हटकर आधुनिक बुवाई की शुरुआत की।

​अधिकारियों ने दिया कदम-कदम पर मार्गदर्शन

फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक कृषि विकास अधिकारी वृषभान अहिरवार ने लगातार खेत का निरीक्षण कर निगरानी की। उन्होंने महिला कृषक को संतुलित खाद व उर्वरक का उपयोग, वैज्ञानिक तरीके से कीट-रोग नियंत्रण और कम लागत में बेहतर कृषि प्रबंधन की बारीकियां सिखाईं। विभाग के सटीक मार्गदर्शन और अनीता बाई की लगन का नतीजा यह रहा कि अरहर की फसल बेहद लहलहाती और शानदार हुई।

​आय बढ़ने से परिवार में आई खुशहाली

अपनी सफलता से उत्साहित अनीता बाई का कहना है कि कृषि विभाग के सहयोग से उन्हें आधुनिक खेती का अमूल्य अनुभव प्राप्त हुआ है। उत्पादन लागत घटने और बेहतर उपज मिलने से उनके परिवार का आर्थिक जीवन सुधरा है। अब वे आगे भी पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति से ही खेती करेंगी। अनीता बाई की यह सफलता साबित करती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही लाभ लिया जाए, तो खेती को निश्चित रूप से मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है।

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