नई दिल्ली, खबर केसरी - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन के बीच शुक्रवार को राजधानी में आयोजित उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता रणनीतिक, कूटनीतिक एवं भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रही। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों राष्ट्रप्रमुखों के बीच विस्तृत चर्चा मुख्यतः तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित रही:
- आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी: सदियों पुराने द्विपक्षीय संबंधों को समकालीन संदर्भ में सुदृढ़ करते हुए चाबहार बंदरगाह और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) जैसी प्रमुख कनेक्टिविटी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाने पर सहमति बनी।
- क्षेत्रीय शांति एवं कूटनीति: पश्चिम एशिया के मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य पर विचार-विमर्श करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि स्थायी समाधान केवल कूटनीति और निरंतर संवाद के माध्यम से ही संभव है। भारत ने क्षेत्र में स्थिरता एवं तनावमुक्ति के लिए अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की।
- बहुपक्षीय मंचों पर सामंजस्य: ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के ढांचे के भीतर समुद्री सुरक्षा, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और वैश्विक वाणिज्यिक हितों की रक्षा के लिए साझा दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया गया।
यह वार्ता पारंपरिक द्विपक्षीय संवाद से आगे बढ़कर क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक एकीकरण और बहुपक्षीय संतुलन को साधने की दिशा में एक प्रभावी कूटनीतिक पहल के रूप में देखी जा रही है।
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