टीमकीटोला की सावित्री बाई और उसके पति से पुलिस पर मारपीट व अमानवीय व्यवहार के गंभीर आरोप; हजारों लोगों ने निकाली आक्रोश रैली, दोषी पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी और FIR की मांग
किरनापुर, बालाघाट, खबर केसरी - किरनापुर थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम टीमकीटोला की दो माह की गर्भवती महिला और उसके पति के साथ पुलिस द्वारा कथित मारपीट एवं अमानवीय व्यवहार का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के विरोध में मंगलवार को मरार माली समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने किरनापुर के उत्कृष्ट मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। दोपहर बाद प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया और आक्रोशित भीड़ ने पुलिस थाने का घेराव कर दिया।प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि चोरी के संदेह में सावित्री बाई और उसके पति को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर उनके साथ बर्बरता की गई। समाज की मांग है कि मामले में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा दोषियों को सेवा से बर्खास्त किया जाए।
सुबह से उत्कृष्ट मैदान में जुटने लगा समाज, पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी
घटना के विरोध में सुबह से ही मरार माली समाज के लोग उत्कृष्ट मैदान में जुटना शुरू हो गए थे। मंच से समाज के पदाधिकारियों और वक्ताओं ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए पीड़ित महिला और उसके पति को न्याय दिलाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि किसी व्यक्ति पर चोरी का संदेह था तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन किसी भी स्थिति में गर्भवती महिला के साथ कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
दोपहर 2 बजे के बाद थाने की ओर कूच, बढ़ता गया आक्रोश
बताया गया कि दोपहर करीब 2 बजे के बाद प्रदर्शनकारी आक्रोश रैली के रूप में किरनापुर थाने की ओर बढ़े। इस दौरान पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए गए, थाने के सामने पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने थाना परिसर का घेराव कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों की ओर से थाने पर पथराव शुरू कर दिया गया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति निर्मित हो गई।
पथराव के बाद पुलिस ने किया लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़े
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और भीड़ को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन माहौल नियंत्रित नहीं हो सका। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस के गोले छोड़े।लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद प्रदर्शनकारी इधर-उधर भागते नजर आए। घटना के बाद किरनापुर में तनाव का माहौल बन गया और पुलिस प्रशासन द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है।
21 अगस्त की घटना ने पकड़ा तूल, 7 सितंबर को सामने आया मामला
मरार माली समाज द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को किरनापुर थाना क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस में हुई चोरी के संदेह के मामले में टीमकीटोला निवासी सावित्री बाई और उसके पति को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। समाज का आरोप है कि महिला उस समय करीब दो माह की गर्भवती थी और पुलिस हिरासत में उसके साथ कथित तौर पर बर्बरता एवं मारपीट की गई।समाज की ओर से पुलिस पर महिला के साथ अमानवीय व्यवहार और उसके पति से भी मारपीट के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह मामला 7 सितंबर को सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता गया।
एसपी ने थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को किया निलंबित
मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक दामेन्द्र तुरकर, दो आरक्षकों और महिला आरक्षक मेघा टेकाम को निलंबित किए जाने की बात सामने आई है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT गठित की गई है और जांच जारी बताई जा रही है।हालांकि, मरार माली समाज का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है। समाज दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने, उन्हें सेवा से बर्खास्त करने और पीड़ित महिला तथा उसके पति को न्याय दिलाने की मांग कर रहा है।
निलंबन नहीं, FIR और बर्खास्तगी चाहिए
प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करना, उन्हें सेवा से बर्खास्त करना, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना तथा पुलिस हिरासत में हुई कथित मारपीट की निष्पक्ष जांच शामिल है।
DGP के नाम SDM को सौंपा ज्ञापन
मरार माली समाज के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक के नाम SDM को ज्ञापन सौंपकर मामले में कठोर कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में आरोपों की निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई गई।
पुलिस थाने पर पथराव ने बढ़ाई चिंता
एक ओर प्रदर्शनकारी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाकर न्याय की मांग कर रहे थे, वहीं थाने पर हुए पथराव ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया। पुलिस प्रशासन के सामने अब एक साथ दो चुनौतियां हैं—एक तरफ गर्भवती महिला से कथित मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच और दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने तथा थाने पर पथराव करने वालों की पहचान कर कार्रवाई करना।
जांच पर टिकी नजरें, सामने आएगा सच
किरनापुर की इस घटना ने पुलिस हिरासत में आम नागरिकों के साथ व्यवहार और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गर्भवती महिला के साथ कथित मारपीट के आरोप बेहद गंभीर हैं। वहीं, थाने पर पथराव और उसके बाद पुलिस द्वारा लाठीचार्ज एवं आंसू गैस का इस्तेमाल भी पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील बना रहा है।अब सभी की निगाहें तीन सदस्यीय SIT की जांच पर टिकी हैं। जांच में यदि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है, यह महत्वपूर्ण होगा। साथ ही प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पथराव करने वालों पर पुलिस क्या कार्रवाई करती है, यह भी आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।


