खबर केसरी डेस्क, नई दिल्ली:- 2 अक्टूबर 2026 को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पावन जयंती मना रहा है। इस अवसर पर राजधानी दिल्ली के राजघाट और विजय घाट से लेकर देश के कोने-कोने में विभिन्न श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सादगी, अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देने वाले इन महापुरुषों को याद करने के लिए आज पूरा देश नतमस्तक नजर आया।
आज सुबह-सुबह देश के प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि स्थल राजघाट पहुंचकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान देश के राजनीतिक गलियारों से भी बड़े पैमाने पर नेताओं का पहुंचना जारी रहा।
इसी कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित तमाम दिग्गज कांग्रेस नेताओं ने भी राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। नेताओं ने बापू की समाधि पर पुष्प चक्र अर्पित किए और कुछ देर मौन रखकर उनके आदर्शों को याद किया।
इसके साथ ही, देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के समाधि स्थल विजय घाट पर भी जाकर नेताओं और गणमान्य नागरिकों ने उनकी सादगी, ईमानदारी और देश के प्रति अगाध समर्पण को याद किया। शास्त्री जी के पुत्र और परिजनों ने भी वहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
"जय जवान, जय किसान" और "अहिंसा परमो धर्मः" के गूंजे नारे
देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में दोनों महापुरुषों के जीवन पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया:
- लाल बहादुर शास्त्री के विचार: स्कूलों में बच्चों को शास्त्री जी के संघर्षपूर्ण जीवन और उनके उस प्रसिद्ध नारे "जय जवान, जय किसान" के महत्व से अवगत कराया गया, जिसने 1965 के युद्ध के दौरान देश में एक नई ऊर्जा का संचार किया था।
- बापू का संदेश: महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को आज के दौर में प्रासंगिक बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनके विचार आज भी पूरी दुनिया को शांति का रास्ता दिखाने का कार्य कर रहे हैं।
गांधी जयंती के इस पावन अवसर पर स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने के लिए देश भर में विशेष स्वच्छता अभियानों की शुरुआत की गई। सरकारी कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों, पार्कों और ग्रामीण अंचलों में नागरिकों, युवाओं और स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर श्रमदान किया और बापू के 'स्वच्छ भारत' के सपने को साकार करने का संकल्प लिया।



