खबर केसरी, जबलपुर : शारदीय नवरात्रि का पावन उत्सव केवल व्रत और पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर छिपी सकारात्मक ऊर्जा को पहचानने का पर्व है। नौ दिनों की इस साधना में तीसरा दिन माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा को समर्पित है।
माँ चंद्रघंटा का स्वरूप जीवन का सबसे बड़ा फलसफा सिखाता है—एक ओर हाथों में अस्त्र-शस्त्र और दूसरी ओर मुखमंडल पर असीम सौम्यता। आज के तनाव भरे दौर में हर व्यक्ति को अपनी ज़िंदगी में इसी संतुलन को उतारने की जरूरत है।
दिव्य स्वरूप: माथे पर घंटा और सिंह की सवारी
माँ के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसीलिए इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। स्वर्ण जैसी कांति, दस भुजाएं, युद्ध के लिए तत्पर अस्त्र-शस्त्र और गर्जना करता सिंह—यह रूप आंतरिक व बाहरी नकारात्मक शक्तियों के दमन का प्रतीक है।
हैरानी की बात यह है कि इतनी युद्धोन्मुख तैयारी के बाद भी माँ का मुख चंद्रमा की भांति शांत और करुणामयी है। उनकी वरद मुद्रा भक्तों को निर्भय होकर जीने का हौसला देती है।
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में माँ चंद्रघंटा से 3 बड़ी सीख
- शक्ति के साथ शालीनता: ताकतवर होने का अर्थ आक्रामक होना नहीं है। आपकी असली शक्ति आपकी विनम्रता और शांत व्यवहार में झलकनी चाहिए, व्यर्थ के क्रोध में नहीं।
- मानसिक स्थिरता (Inner Peace): बाहर परिस्थितियां चाहे जितनी भी प्रतिकूल हों, मन का केंद्र चंद्रमा की तरह शीतल रहना चाहिए ताकि सही फैसले लिए जा सकें।
- अन्याय के खिलाफ मुखरता: जब बात आत्मसम्मान, सत्य और सिद्धांतों की हो, तो सिर झुकाने के बजाय सिंह की तरह डटकर मुकाबला करने का दम रखें।
सरल पूजन विधि, शुभ रंग और प्रिय भोग
डिजिटल युग की व्यस्त दिनचर्या में भी भक्त बड़ी सहजता से माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं:
- शुभ रंग: तीसरे दिन सुनहरे (गोल्डन), पीले या स्लेटी रंग के वस्त्र धारण करना सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
- प्रिय भोग: माँ चंद्रघंटा को दूध और दुग्ध उत्पादों का भोग अति प्रिय है। केसर युक्त खीर, रबड़ी या दूध के पेड़े अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- योग व ध्यान: योग साधना में आज का दिन मणिपुर चक्र (नाभि केंद्र) को जाग्रत करने का माना गया है, जिससे आत्मबल और एकाग्रता बढ़ती है।
इस मंत्र का करें जाप
पूजा के दौरान इस पावन श्लोक का उच्चारण मन को तुरंत एकाग्र करता है:
"पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसीदं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥"
यदि संस्कृत श्लोक का उच्चारण कठिन लगे, तो केवल "ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः" का 108 बार शांत मन से जप करें।
माँ चंद्रघंटा का संदेश स्पष्ट है—सच्चा साहस दूसरों पर हावी होने में नहीं, बल्कि अपने भीतर के भय को जीतकर सही रास्ते पर अडिग रहने में है। इस तीसरे दिन अपने संकोच को छोड़ें, चेहरे पर सौम्यता रखें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
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