पनागर/जबलपुर (खबर केसरी)। धान की फसल में कीट एवं रोगों के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास उमेश कटहरे के नेतृत्व में कृषि अधिकारियों के दल ने पनागर विकासखंड के कई गांवों का सघन दौरा किया और किसानों को फसल सुरक्षा के लिए अहम तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
कृषि अधिकारियों ने जुनवानी, कालाडूमर, बम्हनौदा और उर्दुआ कलां के खेतों में पहुंचकर फसल की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान धान की किस्मों में मुख्य रूप से 'ब्राउन प्लांट हॉपर' (भूरा फुदका) कीट का प्रकोप देखा गया।
खेतों में पानी भरने से बढ़ रहा कीटों का हमला
अधिकारियों ने किसानों को आगाह किया कि खेत में लगातार पानी भरे रहने, अत्यधिक यूरिया (नत्रजन) के उपयोग और घनी बुआई से इस कीट का फैलाव तेजी से होता है। रोकथाम के लिए किसानों को 3 से 4 दिन खेत का पानी निकालकर जमीन को सुखाने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए कृषि विभाग की प्रमुख गाइडलाइन:
- नियमित निगरानी: धान के पौधों के निचले हिस्से और तने के पास रोजाना जांच करें। कीटों की संख्या अधिक होने पर ही अनुशंसित कीटनाशक डालें।
- जैविक उपाय: शुरुआती अवस्था में नीम तेल या नीम आधारित जैविक उत्पादों का छिड़काव करें।
- दवा का उपयोग: प्रकोप गंभीर होने पर विभागीय अनुशंसा के अनुसार 'पाइमेट्रोजिन' आधारित कीटनाशक का इस्तेमाल करें।
- तनाव व पत्ती लपेटक कीट: फेरोमोन ट्रैप और जैविक नियंत्रण के तरीकों को प्राथमिकता दें।
- ब्लास्ट व शीथ ब्लाइट रोग: संतुलित खाद का उपयोग करें और लक्षण दिखने पर अनुशंसित फफूंदनाशी (फंगीसाइड) का छिड़काव करें।
- सावधानी: बिना पहचान के किसी भी दवा का अंधाधुंध छिड़काव न करें और एक ही रसायन का बार-बार इस्तेमाल करने से बचें।
अवलोकन के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पंकज शर्मा और कृषि विस्तार अधिकारी एस.जी. मनजी सहित स्थानीय किसान मौजूद रहे।
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