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लांजी से हैदराबाद मजदूरी करने जा रहे मजदूरों की बोलेरो पर पलटा ट्रक, छह की मौत

 

ओवरटेक के दौरान हुआ भीषण हादसा, ट्रक के नीचे दब गई बोलेरो; तीन घंटे की मशक्कत के बाद क्रेन से निकाले गए शव, यातायात और आरटीओ व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

विशेष संवाददाता लांजी/बालाघाट -  लांजी क्षेत्र से मजदूरी करने हैदराबाद जा रहे मजदूरों से भरी एक बोलेरो वाहन के ऊपर बड़ा ट्रक पलट जाने से देर रात भीषण सड़क हादसा हो गया। गोंदिया जिले के रावणवाड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नागरा के समीप हुए इस दर्दनाक हादसे में एक तीन वर्षीय मासूम सहित छह लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि कई मजदूर घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई।प्राप्त जानकारी के अनुसार बोलेरो वाहन में करीब 13 मजदूर सवार थे, जो लांजी क्षेत्र के सावरीखुर्द से शाम के समय मजदूरी के लिए हैदराबाद रवाना हुए थे। बताया जा रहा है कि देर रात नागरा के पास एक बड़ा ट्रक बोलेरो को ओवरटेक करने के दौरान अचानक अनियंत्रित होकर चलती बोलेरो से टकराया और उसी बोलेरो वाहन के ऊपर पलट गया। भारी-भरकम ट्रक के नीचे बोलेरो पूरी तरह दब गई।

ट्रक के नीचे दबे मजदूर, घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे की सूचना मिलते ही रावणवाड़ी पुलिस सहित स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। बोलेरो के ट्रक के नीचे बुरी तरह दब जाने के कारण मृतकों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल था। पुलिस एवं स्थानीय लोगों की मदद से क्रेन की सहायता ली गई और करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद वाहन में फंसे मृतकों एवं घायलों को बाहर निकाला जा सका।हादसे में मृतकों की पहचान संतोष मात्रे एवं उनकी पत्नी सुशीला निवासी किन्ही, ज्योति सतेकर एवं रूपसेन सतेकर निवासी नीमदेवाड़ा, ग्राम सावरीखुर्द निवासी तीन वर्षीय मासूम आरुष मात्रे तथा लोढ़ामा निवासी एक महिला के रूप में बताए जाने की जानकारी है। हालांकि पुलिस द्वारा मामले की जांच और मृतकों की पहचान की औपचारिक पुष्टि की जा रही है।

मृतकों के शव मरच्यूरी में, घायलों का अस्पताल में उपचार

हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए मरच्यूरी में रखवाया गया है। वहीं हादसे में घायल मजदूरों को गोंदिया के कुंवर तिलक सिंह शासकीय अस्पताल सहित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस हादसे के वास्तविक कारणों, ट्रक चालक की भूमिका और वाहन की स्थिति सहित अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

लांजी से मजदूरों की ओवरलोडिंग का खेल कब रुकेगा?

इस दर्दनाक हादसे ने लांजी क्षेत्र से प्रतिदिन मजदूरी के लिए बाहर जाने वाले श्रमिकों की परिवहन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि लांजी क्षेत्र से प्रतिदिन बड़ी संख्या में चार पहिया वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां भरकर लंबी दूरी के लिए रवाना की जाती हैं।कई बार इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक लोगों को बैठाकर या ठूंस-ठूंसकर ले जाने के आरोप सामने आते हैं। ऐसे वाहनों में यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ वाहन की फिटनेस, परमिट, बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

यातायात और आरटीओ विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि क्षेत्र से ओवरलोड सवारी वाहन नियमित रूप से आवागमन करते हैं तो जिम्मेदार विभागों की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ती?
स्थानीय लोगों का कहना है कि लांजी से निकलने वाले वाहन विभिन्न मार्गों से होकर दूसरे जिलों और राज्यों तक पहुंचते हैं। ऐसे में रास्ते में होने वाली जांच और कार्रवाई की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।हालांकि, वाहन चालकों से कथित रूप से पैसे लेकर उन्हें छोड़ने जैसे आरोप भी स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसी शिकायतें सामने आती हैं तो संबंधित विभागों को निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध पूर्व में क्या कार्रवाई की गई और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके पीछे कारण क्या रहे।

क्या किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?

लांजी क्षेत्र से मजदूरी के लिए महाराष्ट्र, तेलंगाना और अन्य राज्यों की ओर बड़ी संख्या में श्रमिकों के आने-जाने के बीच यह हादसा प्रशासन और परिवहन विभाग के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। एक ही वाहन में बड़ी संख्या में मजदूरों को बैठाकर लंबी दूरी तय कराने की व्यवस्था पर तत्काल निगरानी की आवश्यकता है।सवाल यह भी है कि क्या परिवहन विभाग द्वारा ऐसे वाहनों की नियमित जांच की जाती है? क्या वाहनों की फिटनेस और परमिट की जांच होती है? क्या वाहन में निर्धारित संख्या से अधिक यात्रियों को बैठाने वालों पर कार्रवाई होती है? और यदि कार्रवाई होती है तो उसके बावजूद ओवरलोड वाहन लगातार सड़कों पर कैसे दौड़ रहे हैं?

मजदूरों की जान की कीमत पर नहीं चल सकता परिवहन का यह खेल
मजदूरी करने निकले गरीब परिवारों के लोगों की जिंदगी किसी भी कीमत पर जोखिम में नहीं डाली जा सकती। हादसे में तीन साल के मासूम सहित छह लोगों की मौत ने व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं।अब जरूरत केवल हादसे की जांच तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि लांजी क्षेत्र से बाहर जाने वाले सवारी वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा, क्षमता और ओवरलोडिंग की सघन जांच किए जाने की है। साथ ही यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत अथवा लापरवाही जांच में सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।इस भीषण हादसे ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा, या अब समय रहते सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड सवारी वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी?



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